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Farmer Loan : किसानों को अब आधार कार्ड नंबर पर ही मिल जाएगा लोन, आरबीआई से एमओयू करेगी सरकार 

किसानों को अब आधार कार्ड पर हरियाणा सरकार लोन देने की तैयारी में लगी हुई है। इसके बाद किसानों को लोन लेने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे
 
Farmer Loan  किसानों को अब आधार कार्ड नंबर पर ही मिल जाएगा लोन, आरबीआई से एमओयू करेगी सरकार

किसानों को अब आधार कार्ड पर हरियाणा सरकार लोन देने की तैयारी में लगी हुई है। इसके बाद किसानों को लोन लेने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि उनको आधार कार्ड की वेरिफिकेशन के साथ ही उनके खाते में बैंक लोन की राशि आ जाएगी।  हरियाणा सरकार की तरफ से किसानों की सुविधा के लिए आरबीआई से एमओयू साइन करने वाली है।

इसके बाद किसानों को बैंक व राजस्व विभाग के कार्यालयों में चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि आधार कार्ड के आधार नंबर पर ही किसान को लोन देने की योजना बनाई जा रही है। जबकि जमीन से जुड़ी सभी जानकारी डिजिटल रिकार्ड से अपने आप मिल जाएगी।

हरियाणा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुमिता मिश्रा ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा जल्द ही रिर्जव बैंक आफ इंडिया यानी आरबीआई से एमओयू किया जा रहा है। इसके तहत कृषि लोन की मंजूरी डिजिटाइज्ड हो जाएगा और जमीन का रिकार्ड भी आनलाइन ही उपलब्ध हो जाएगा। 

लोन लेने के पुराने सिस्टम को बदला जाएगा 

किसानों को लोन लेने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते है, लेकिन नए सिस्टम के तहत किसानों को कार्यालयों के चक्कर काटने की बजाए सीधे आधार कार्ड नंबर से ही लोन मिल जाएगा। बैंक द्वारा जैसे ही आधार कार्ड नंबर डाला जाएगा तो किसान की जमीन से संबंधित पूरा रिकार्ड दिखाई देगा।इससे वित्तीय संस्थानों और राजस्व प्रशासन के बीच बिना किसी रुकावट के समन्वय पक्का होगा। 'पटवारी तहसील बैंक का जो पुराना सिस्टम था, जिसकी वजह से देरी होती थी, उसे खत्म कर दिया जाएगा।

यह प्रोजेक्ट दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में किसान क्रेडिट कार्ड लोन पर ध्यान दिया जाएगा, जो हरियाणा में खेती के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला क्रेडिट साधन है। आधार प्रमाणीकरण के बाद जमीन का विवरण अपने आप मिल जाएगा। लोन से जुड़ी एंट्री अपने आप जमीन के रिकार्ड में दर्ज हो जाएंगी और भुगतान करने पर गिरवी की एंट्रीज तुरंत हटा दी जाएंगी।

यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी मानवीय दखल के काम करेगी, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। दूसरे चरण में इस सिस्टम को बढ़ाकर सभी तरह के कृषि और ग्रामीण लोन को शामिल किया जाएगा, जिससे पूरे राज्य में एक यूनिफाइड डिजिटल क्रेडिट इकोसिस्टम बनेगा।

इस पहल से सभी स्टेकहोल्डर्स को काफी फायदे होंगे। किसानों का समय बचेगा, उन्हें तेजी से क्रेडिट मिलेगा और लोन स्टेटस और जमीन के रिकार्ड की रियल टाइम ट्रैकिंग से पूरी पारदर्शिता मिलेगी। बैंकों और फाइनेंशियल संस्थानों को रियल टाइम में वेरिफाइड जमीन का डेटा मिलेगा, जिससे धोखाधड़ी वाले आवेदनों से जुड़े जोखिम कम होंगे और परिचालन क्षमता (आपरेशनल एफिशिएंसी) बेहतर होगी। राजस्व प्रशासन को खुद-ब-खुद अपडेट होने वाले रिकार्ड, कम गलतियों और जमीन के रिकार्ड की बेहतर विश्वसनीयता से फायदा होगा।